"ननिहाल"
वो कच्चा मकान है याद मुझे
ननिहाल का दालान है याद मुझे
वो हरकतें बचकानी, वो शा
में सुहानी
वो काग़ज की नईया, वो बारिश का पानी
बरसता आसमान है याद मुझे
गोबर से लिपा आँगन, जहाँ बीत गया बचपन
वो सारे रिश्ते-नाते, सपना, सालू, चंदन, मंदन
सरसों से भरा खलिहान हैयाद मुझे
— Vikas Sangam















