raaste sikhaate hain kis se kya alag rakhna | रास्ते सिखाते हैं किस से क्या अलग रखना

  - Aadil Raza Mansoori

रास्ते सिखाते हैं किस से क्या अलग रखना
मंज़िलें अलग रखना क़ाफ़िला अलग रखना

बअ'द एक मुद्दत के लौट कर वो आया है
आज तो कहानी से हादिसा अलग रखना

जिस से हम ने सीखा था साथ साथ चलना है
अब वही बताता है नक़्श-ए-पा अलग रखना

कूज़ा-गर ने जाने क्यूँँ आदमी बनाया है
उस को सब खिलौनों से तुम ज़रा अलग रखना

लौट कर तो आए हो तजरबों की सूरत है
पर मिरी कहानी से फ़ल्सफ़ा अलग रखना

तुम तो ख़ूब वाक़िफ़ हो अब तुम्ही बताओ ना
किस में क्या मिलाना है किस से क्या अलग रखना

ख़्वाहिशों का ख़म्याज़ा ख़्वाब क्यूँँ भरें 'आदिल'
आज मेरी आँखों से रत-जगा अलग रखना

  - Aadil Raza Mansoori

Hadsa Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aadil Raza Mansoori

As you were reading Shayari by Aadil Raza Mansoori

Similar Writers

our suggestion based on Aadil Raza Mansoori

Similar Moods

As you were reading Hadsa Shayari Shayari