हर बार हुआ है जो वही तो नहीं होगा

डर जिस का सताता है अभी तो नहीं होगा

दुनिया को चलो परखें नए दोस्त बनाएँ
हर शख़्स ज़माने में वही तो नहीं होगा

वो शख़्स बड़ा है तो ग़लत हो नहीं सकता
दुनिया को भरोसा ये अभी तो नहीं होगा

है उस का इशारा भी समझने की ज़रूरत
होगा तो कभी होगा अभी तो नहीं होगा

दो-चार गड़े मुर्दे उखाड़ेंगे किसी रोज़
हर बार नया झगड़ा कभी तो नहीं होगा

कुछ और भी हो सकता है तक़रीर का मतलब
जो आप ने समझा है वही तो नहीं होगा

हर बार ज़माने का सितम होगा मुझी पर
हाँ मैं ही बदल जाऊँ कभी तो नहीं होगा

— Aalok Shrivastav

More by Aalok Shrivastav

Other ghazal from the same pen

See all from Aalok Shrivastav →

Dost Shayari

Shers of dost.

All Dost Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling