किस ने तुम सेे कह दिया ये लड़का तन्हा चल रहा है

ग़म ख़ुशी आँसू हँसी हर एक लम्हा चल रहा है

रौशनी को ही ख़ुदा कहता-सुनाता था कभी वो
हाँ वही जो सब दियों को बस बुझाता चल रहा है

तुम को पाने के लिए गर ख़ुद को खोना है मुझे तो
हिज्र मैं ने चुन लिया है वस्ल महँगा चल रहा है

कल की चिंता है उन्हें जो ढोंग करते आ रहे हैं
साधु को चिंता नहीं है गीत गाता चल रहा है

जोड़ियाँ गर बन रही है ख़ुद ख़ुदा के घर में ही तो
मुझ को लगता है वहाँ भी कोई धंधा चल रहा है

पास उस के हूँ बहुत पर ख़ास उस का हूँ नहीं मैं
यार मेरा हाल भी इमरोज़ जैसा चल रहा है

हर किसी को मैं इसी उम्मीद से ही देखता था
कोई तो ये पूछ लेगा और कैसा चल रहा है

— Aatish Alok

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