किसने तुम सेे कह दिया ये लड़का तन्हा चल रहा है
ग़म ख़ुशी आँसू हँसी हर एक लम्हा चल रहा है
रौशनी को ही ख़ुदा कहता-सुनाता था कभी वो
हाँ वही जो सब दियों को बस बुझाता चल रहा है
तुमको पाने के लिए गर ख़ुद को खोना है मुझे तो
हिज्र मैंने चुन लिया है वस्ल महँगा चल रहा है
कल की चिंता है उन्हें जो ढोंग करते आ रहे हैं
साधु को चिंता नहीं है गीत गाता चल रहा है
जोड़ियाँ गर बन रही है ख़ुद ख़ुदा के घर में ही तो
मुझको लगता है वहाँ भी कोई धंधा चल रहा है
पास उसके हूँ बहुत पर ख़ास उसका हूँ नहीं मैं
यार मेरा हाल भी इमरोज़ जैसा चल रहा है
हर किसी को मैं इसी उम्मीद से ही देखता था
कोई तो ये पूछ लेगा और कैसा चल रहा है
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