शहर में भी मैं नहीं जो तुम को पाया लौट आया
जब उजाले ने ही मुझ को काट खाया लौट आया
इक तरफ़ तो थी चमक औ इक तरफ़ था गाँव मेरा
जैसे ही मैं चौंधियाया सर घुमाया लौट आया
तुम अना पर आ गई थी सो बताना था ज़रूरी
पा भी सकता हूँ मैं तुम को ये बताया लौट आया
— Aatish Alok















