भोर होने को है हर रात को यूँँ समझा है
मुश्किलों से भरे हालात को यूँँ समझा है
शांत इस तरह ही होती है पहाड़ी नद्दी
हर उबलते हुये जज़्बात को यूँँ समझा है
मेरा किरदार कहानी में अभी है ज़िंदा
बाद मुद्दत की मुलाक़ात को यूँँ समझा है
इम्तिहानों के लिए ज्ञान मिला है आतिश
ज़िन्दगी में मिली हर मात को यूँँ समझा है
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