कोट तो दिखता है अस्तर नहीं दिखता मुझ को
कौन रख लाया है ख़ंजर नहीं दिखता मुझ को
मसअला जीत नहीं ख़ुद को बचाने का है
थक भी जाऊँ तो भी बिस्तर नहीं दिखता मुझ को
ज़िंदगी साथ मेरे एक बड़ी दिक़्क़त है
प्यास दिखती है समुंदर नहीं दिखता मुझ को
— Aatish Indori
कौन रख लाया है ख़ंजर नहीं दिखता मुझ को
मसअला जीत नहीं ख़ुद को बचाने का है
थक भी जाऊँ तो भी बिस्तर नहीं दिखता मुझ को
ज़िंदगी साथ मेरे एक बड़ी दिक़्क़त है
प्यास दिखती है समुंदर नहीं दिखता मुझ को
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