"दवात"

मेरी चिट्ठियों में मुहब्बत की गहराई झलकने लगी थी
क्योंकि मैं ने अपना ख़ून दवात में भर लिया था

पर तुम्हें ये लग रहा था कि ऐसा में क्यूँ कर रहा हूँ
मैं ने बताया नहीं कि तुम ने जो बे-वफ़ाई की थी उस का मुझे पता चल गया था
इस लिए मैं ने ज़ियादा मुहब्बत देना शुरू' कर दिया था

तुम पर बे-वफ़ाई पर बे-वफ़ाई करते जा रहे थे
मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि मुहब्बत किस तरह से और बढ़ाऊँ कि तुम पूरे मेरे हो जाओ

मैं ने दवात में ख़ून के साथ अपने आँसू भी मिला लिए थे
चिट्ठियाँ और गहरी होती जा रही थी

तुम उस गहराई में उतरने से गुरेज़ कर रही थी
ये ज़रूरी भी था वरना तुम डूब कर मर जाते

तुम को पूरा अपना बनाना था
ये सोच कर मैं उस हर दवात में घुल गया जिस से प्रेमी चिट्ठियाँ लिखते थे
ताकि तुम इतनी सारी चिट्ठियाँ पढ़ोगी तो मेरी मुहब्बत को समझ सकोगी

अब मुझे तुम्हारी चिट्ठी आती हैं तो ऐसा लगता है जैसे वो चिट्ठी मैं ने तुम्हें लिखी है

— Aatish Indori

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