“सफ़ाई-कर्मी”
अँधेरा चीर कर देखो उजाला ला रहा है
मुहल्ले में हमारे इक फ़रिश्ता आ रहा है
हमारे आने से पहले सदा वो आ रहा है
हमारे वास्ते महका के आलम जा रहा है
रोज़ निभाता है जो रिश्ते को
हम ने देखा है उस फ़रिश्ते को
मेरे भाई सलाम तुझ को
मेरे भाई प्रणाम तुझ को
— Aatish Indori















