ye aur baat tere dil men ghar nahin karunga | ये और बात तेरे दिल में घर नहीं करूँँगा

  - Abhishek shukla

ये और बात तेरे दिल में घर नहीं करूँँगा
पर इस मकाम से आगे सफ़र नहीं करूँँगा

दुआएँ क्या दूँ उसे ज़िंदगी की, इतना है
मैं ज़हर हूँ मगर उस पर असर नहीं करूँँगा

किसी से झूठी मोहब्बत किसी से सच्चा बैर
मैं कर तो सकता हूँ ये सब मगर नहीं करूँँगा

दवाम बख़्श तो सकता हूँ ख़ामोशी को मगर
ये काम मैं किसी आवाज़ पर नहीं करूँँगा

किए जो वक़्त पर उसका मआल देख चुका
कोई भी काम मैं अब वक़्त पर नहीं करूँँगा

गुज़ार दूँगा मैं अपने फ़िराक़ में ख़ुद को
ख़ुद अपने होने की ख़ुद को ख़बर नहीं करूँँगा

  - Abhishek shukla

Akhbaar Shayari

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