soye hue palang ke saa.e jaga gaya | सोए हुए पलंग के साए जगा गया

  - Adil Mansuri

सोए हुए पलंग के साए जगा गया
खिड़की खुली तो आसमाँ कमरे में आ गया

आँगन में तेरी याद का झोंका जो आ गया
तन्हाई के दरख़्त से पत्ते उड़ा गया

हँसते चमकते ख़्वाब के चेहरे भी मिट गए
बत्ती जली तो मन में अंधेरा सा छा गया

आया था काले ख़ून का सैलाब पिछली रात
बरसों पुरानी जिस्म की दीवार ढा गया

तस्वीर में जो क़ैद था वो शख़्स रात को
ख़ुद ही फ़्रेम तोड़ के पहलू में आ गया

वो चाय पी रहा था किसी दूसरे के साथ
मुझ पर निगाह पड़ते ही कुछ झेंप सा गया

  - Adil Mansuri

Nazar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Adil Mansuri

As you were reading Shayari by Adil Mansuri

Similar Writers

our suggestion based on Adil Mansuri

Similar Moods

As you were reading Nazar Shayari Shayari