बराए-इश्क़ जब बदनाम होगा
जहाँ में हर तरफ़ कोहराम होगा
उसे मुझ सेे जुदा करके तो देखो
तुम्हारा यार क्या अंजाम होगा
बनेगी वो अगर राधा हमारी
हमारा नाम फिर घनश्याम होगा
वो मुझ सेे कह रही थी बाद शादी
मिरा मज़हब सनम इस्लाम होगा
चले हम छोड़कर दुनिया तुम्हारी
क़फ़न को ओढ़कर आराम होगा
सिकंदर जीत कर हारा हुआ था
कि साहिल सिंध में नाकाम होगा
किसी तारीक कोने में छुपा हूँ
कि अफ़ज़ल आज से गुमनाम होगा
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