ज़िंदगी ने यही सिखाया है
धूप में छाँव काम आया है
आरज़ू ख़त्म हो गई मेरी
फोन पर कौन हो बुलाया है
थी तमन्ना गले लगा लो तुम
और फिर मौत ने लगाया है
क्या यही प्यार की हक़ीक़त है
प्यार को यार किसने पाया है
और भी दोस्त हैं हमारे पर
तुमको अपना सनम बनाया है
इस ग़ज़ल को तुम्हारी हाजत है
इसने तो नूर तुम सेे पाया है
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