gair kii baaton ka aaKHir aitbaar aa hi gaya | ग़ैर की बातों का आख़िर ऐतबार आ ही गया

  - Agha Hashr Kashmiri

ग़ैर की बातों का आख़िर ऐतबार आ ही गया
मेरी जानिब से तेरे दिल में ग़ुबार आ ही गया

जानता था खा रहा है बे-वफ़ा झूठी क़सम
सादगी देखो कि फिर भी ऐतिबार आ ही गया

पूछने वालों से तो मैंने छुपाया दिल का राज़
फिर भी तेरा नाम लब पे एक बार आ ही गया

तू न आया ओ वफ़ा दुश्मन तो क्या हम मर गए
चंद दिन तड़पा किए आख़िर क़रार आ ही गया

जी में था ऐ 'हश्र' उस से अब न बोलेंगे कभी
बे-वफ़ा जब सामने आया तो प्यार आ ही गया

  - Agha Hashr Kashmiri

Dhokha Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Agha Hashr Kashmiri

As you were reading Shayari by Agha Hashr Kashmiri

Similar Writers

our suggestion based on Agha Hashr Kashmiri

Similar Moods

As you were reading Dhokha Shayari Shayari