हज़ार दिल में सवाल रखना उसे न कहना
और इस हुनर में कमाल रखना उसे न कहना
तुम्हारी सारी उदासियों का सबब वही है
ये ठीक है पर ख़याल रखना उसे न कहना
वो इस बहाने पलट के आएगा देख लेना
किताब उस की सँभाल रखना उसे न कहना
वो तर्क-ए-उल्फ़त की बात छेड़े तो मान जाना
फिर अपना जैसा भी हाल रखना उसे न कहना
ये रख-रखाव ही शाइरी है सो मेरे शाइर
ग़ज़ल में उस का जमाल रखना उसे न कहना
— Ahmad Salman















