maine kaii shabein kaatee is aitbaar men | मैंने कई शबें काटी इस ऐतबार में

  - Faiz Ahmad

मैंने कई शबें काटी इस ऐतबार में
तू लौट आएगी मैं रहा इंतेज़ार में

मेरी तरह किसे ज़िन्दगी में मिला है ये
शामिल हुआ जो बाइस तिरे बादाख्वार में

मैं ढूंडने लगा हूँँ दिसंबर में जून को
ये सब बताते हैं पड़ गया हूँँ मैं प्यार में

उस सेे करेंगे क्या शिकवा हम जो बदल गया
हम भी कहाँँ थे खुदके कभी इख्तियार में

न जीत लूं उसे 'इश्क़ के इम्तेहान में
वो सब बदल रहा है मिरे इख्तिबार में

नफ़रत की है गुज़ारिश मुझे हर किसी से अब
ये दिल बिगड़ गया है मिरा लाड-प्यार में

मैं जिस सेे खुदके गम भी नहीं संभले जाते हैं
और वो के ढूंडता है मुझे गम-गुसार में

बस तू ही है मोहब्बत मिरी और रहेगी भी
गर तू कहे तो कह दूं ये सब इश्तिहार में

जिसकी सताती थी फिक्र दिन रात मुस्तकिल
अहमद ने खो दिया उसको ही इगतिरार में

  - Faiz Ahmad

Motivational Shayari in Hindi

Our suggestion based on your choice

More by Faiz Ahmad

As you were reading Shayari by Faiz Ahmad

Similar Writers

our suggestion based on Faiz Ahmad

Similar Moods

As you were reading Motivational Shayari in Hindi Shayari