tamaam koshishein bekar ho gaii ahmad | तमाम कोशिशें बेकार हो गई अहमद

  - Faiz Ahmad

तमाम कोशिशें बेकार हो गई अहमद
वो आँखें और की तलबगार हो गई अहमद

वो मुझको छोड़ गया सारे वादे तोड़ गया
तमाम क़स
में भी लाचार हो गई अहमद

उसे तो मिल गया जो उसने चाहा था लेकिन
मिरी दुआएँ तो बेकार हो गई अहमद

उन्हें रिहा किया उनके हसीन होने पर
मिरी दलीलें गिरफ़्तार हो गई अहमद

के इनके होते हुए भी उसे गँवाना पड़ा
हमारी नेकियाँ गद्दार हो गई अहमद

वो साथ थी तो ग़मों से नजात मिल रही थी
जो बिछड़ी ख़ुशियाँ भी दो-चार हो गई अहमद

  - Faiz Ahmad

Anjam Shayari

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