हरगिज़ किसी भी तौर किसी के न हो सके

हम उस के बा'द और किसी के न हो सके

आया था ऐसा दौर सभी के हुए थे हम
फिर आया ऐसा दौर किसी के न हो सके

अफ़्सोस तुम को इतनी भी फ़ुर्सत नहीं मिली
तुम मुझ पे करते ग़ौर किसी के न हो सके

या'नी हम उम्र भर रहे बर्बाद ख़ुद में ही
या'नी ठिकाना-ठोर किसी के न हो सके

जो लोग सब का ख़ास बने फिर रहे थे 'अक्स'
वो लोग ख़ास तौर किसी के न हो सके

— Aks samastipuri

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