ban gaya tadbeer se har raasta taqdeer ka | बन गया तदबीर से हर रास्ता तक़दीर का

  - Aleena Itrat

बन गया तदबीर से हर रास्ता तक़दीर का
अब नहीं कुछ ख़ौफ़ पैरों को किसी ज़ंजीर का

कर दिया ख़ामोश शो'लों ने जला कर हर वरक़
लफ़्ज़ फिर भी चीख़ता इक रह गया तहरीर का

ख़ाक सरगर्दां है हर सू कुछ नहीं बदला यहाँ
देखती हैं अब भी राहें रास्ता रहगीर का

एक रुख़ पर थीं बहारें एक रुख़ बे-रंग-ओ-नूर
और मेरी सम्त था बे-रंग रुख़ तस्वीर का

जब निशाने पर मिरे दिल के सिवा कुछ भी न था
फिर असर होता न क्यूँँ तेरी नज़र के तीर का

हम फ़क़ीरी में 'अलीना' शाद हैं आबाद हैं
क्या हमें करना है तेरी दौलत-ओ-जागीर का

  - Aleena Itrat

Charagh Shayari

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