तन्हा रौशन रहता है वीराने में
जाने क्या जलता रहता है तारे में
ऐसे वो भरती थी अपनी बाँहों में
जैसे कोई कम्बल जकड़े जाड़े में
इन लोगों ने देखा है बस दोस्त तुझे
मैं ने तो सोचा हैं तेरे बारे में
ऐसे लाती हैं अब रातें याद तिरी
जैसे कोई दर्द परोसे खाने में
दे आया मैं उसकी शादी में जाकर
अपने आँसू करके बंद लिफ़ाफ़े में
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