vyatha meri samjhti kyun nahin hai | व्यथा मेरी समझती क्यूँँ नहीं है

  - Aman Mishra 'Anant'

व्यथा मेरी समझती क्यूँँ नहीं है
मेरे जैसी ये पीढ़ी क्यूँँ नहीं है

है तेरा हुस्न इतना ख़ूबसूरत
तो तेरी बातें अच्छी क्यूँँ नहीं है

हमेशा करती है उल्टा कहे का
तू मेरी बात सुनती क्यूँँ नहीं है

है कुर्सी फ़ैन सब उपलब्ध लेकिन
यहाँ कमरे में रस्सी क्यूँँ नहीं है

अगर ये मेरी शादी है तो इस
में
बताओ मेरी मर्ज़ी क्यूँँ नहीं है

मैं तेरे बाद भी ख़ुश रह ही लूँगा
मुझे इसकी तसल्ली क्यूँँ नहीं है

थी जैसी ख़्वाब में दुनिया सुहानी
हक़ीक़त में ये वैसी क्यूँँ नहीं है

सभी है रंग मेरे पास तो फिर
तेरी तस्वीर बनती क्यूँँ नहीं है

हुआ क्या है बताओ मुझको पापा
बताओ घर में दादी क्यूँँ नहीं है

  - Aman Mishra 'Anant'

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