तुम इक दिन भूल जाओगे
हँसाओगे रुलाओगे तुम इक दिन भूल जाओगे
हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे
दिखाओगे मुझे सपने ख़ुशी की वादियों वाले
जज़ीरों में कहीं तन्हा मुझे तुम छोड़ आओगे
हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे
तुम्हें ना देख कर कितनी तड़पती हैं मेरी आँखें
तुम्हें खो देने के डर से ये जागी हैं कई रातें
उदासी छाई रहती है दिल-ए-बे-ताब में जितनी
मुझे लगता नहीं है ये कि तुम भी छटपटाओगे
हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे
मुहब्बत कितनी है दिल में यक़ीनन कह न पाऊँगा
मगर इतना यक़ीं तो है कि तुम बिन रह न पाऊँगा
बड़े वादे किए तुम ने रहूँगा साथ मैं हमदम
हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे
हँसाओगे रुलाओगे तुम इक दिन भूल जाओगे
हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे















