KHud ko har aarzoo ke us paar kar liya hai | ख़ुद को हर आरज़ू के उस पार कर लिया है

  - Ameer Imam

ख़ुद को हर आरज़ू के उस पार कर लिया है
हम ने अब उस का साया दीवार कर लिया है

जाती थी मेरे दिल से जो तेरे आस्ताँ तक
दुनिया ने उस गली में बाज़ार कर लिया है

दे दाद आ के बाहर शह-ए-रग से ख़ूँ हमारा
उस ने जो अपना चेहरा गुलनार कर लिया है

बस चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ को मिलते नहीं हैं आँसू
वर्ना तिरा मुरक्कब तय्यार कर लिया है

है वज्ह-ए-कज-कुलाही तौक़-ए-गुलू हमारा
ज़ंजीर-ए-पा को अपनी तलवार कर लिया है

महसूस कर रहा हूँ ख़ारों में क़ैद ख़ुशबू
आँखों को तेरी जानिब इक बार कर लिया है

इस बार वो भी हम से इंकार कर न पाया
हम ने भी अब की उस से इक़रार कर लिया है

  - Ameer Imam

Khushboo Shayari

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