डर यहाॅं सब को ख़ुद-कुशी का हैकैसा ये हाल आदमी का हैइश्क़ हो चाहे हो हवस यारोंखेल सारा ये दो घड़ी का हैकाट लेंगे ये साल तुम बिन परइक महीना जो फ़रवरी का हैइश्क़ हो तो ये ध्यान रखना तुमवक़्त ये कौन सी सदी का हैजाने देना जो जाना चाहे गरअब कहाॅं कोई भी किसी का है— Amit Kumar