है ज़रूरी वो मेरी ख़ुशी के लिए
मिलता है जो मुझे दो-घड़ी के लिए
लोग शाबाशी देगें उसे जीत पर
हार जाता हूँ सो मैं अभी के लिए
उस ने मुँह फेरा है इश्क़ से वर्ना क्या
क्या नहीं सोचा था फ़रवरी के लिए
दोस्त भी देखते हो जहाँ फ़ाइदा
तो गिला क्या रखे अजनबी के लिए
रोज़ सपने कुचल देना अपने यहाँ
पहली ये शर्त है मुफ़लिसी के लिए
— Amit Kumar















