हम सबपे कुछ न कुछ उधार है
सागर पर नदियों का उधार है
नाव का पतवारों पर उधार है
पंछियों का पेड़ो पर उधार है
शाम का सुब्ह पर उधार है
एक बात, एक नाराज़गी और
एक चाय का तेरा मुझ पर उधार है
— Animesh Choubey
सागर पर नदियों का उधार है
नाव का पतवारों पर उधार है
पंछियों का पेड़ो पर उधार है
शाम का सुब्ह पर उधार है
एक बात, एक नाराज़गी और
एक चाय का तेरा मुझ पर उधार है
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