hain bahut kaam zindagi ke paas | हैं बहुत काम ज़िन्दगी के पास

  - Ankit Maurya

हैं बहुत काम ज़िन्दगी के पास
नहीं रुकना है बस मुझी के पास

मिलने आना तो ऐसे आना तुम
छोड़ के वक़्त को घड़ी के पास

रोक रक्खा था वक़्त जिसके लिए
नहीं है वक़्त अब उसी के पास

दोस्त हम हैं किसी के ठुकराए
जा नहीं सकते अब किसी के पास

देखना कौन चाहे वक़्त अपना
आँख जाती है ख़ुद घड़ी के पास

याद आती हैं झील सी आँखें
बैठे रहते हैं हम नदी के पास

  - Ankit Maurya

Waqt Shayari

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