kaise samjhaayen tujhe kis baat par samjhaayein ham | कैसे समझाएँ तुझे किस बात पर समझायें हम

  - anupam shah

कैसे समझाएँ तुझे किस बात पर समझायें हम
ऐ दिल-ए-नादाँ तुझे लेकर कहाँ को जाएँ हम

हम ज़माने से, थमें, तकते रहे, रस्ता तिरा
और फिर यूँँ ही कहीं पत्थर के न बन जाएँ हम

इस जनम के बाद सारी ज़िन्दगी को मिलना तुम
आज कुछ ऐसा करो, बस ठीक से मर जाएँ हम

झूठ भी बोला करो तो ऐसे मत बोला करो
एक दूजे की नज़र में, देख भी न पायें हम

चल तुझे फिर ले चलूँ मैं संग अपने ज़िन्दगी
दूर इतना, फिर किसी के हाथ में न आएं हम

  - anupam shah

Jhooth Shayari

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