soch raha hoon ghar aangan men ek lagaaun aam ka ped | सोच रहा हूँ घर आंगन में एक लगाऊं आम का पेड़

  - Anwar Jalalpuri

सोच रहा हूँ घर आंगन में एक लगाऊं आम का पेड़
खट्टा खट्टा, मीठा मीठा यानी तेरे नाम का पेड़

एक जोगी ने बचपन और बुढ़ापे को ऐसे समझाया
वो था मेरे आग़ाज़ का पौधाये है मेरे अंजाम का पेड़

सारे जीवन की अब इस सेे बेहतर होगी क्या तस्वीर
भोर की कोंपल, सुब्ह के मेवे, धूप की शाख़ें, शाम का पेड़

कल तक जिसकी डाल डाल पर फूल मसर्रत के खिलते थे
आज उसी को सब कहते हैं रंज-ओ-ग़म-ओ-आलाम का पेड़

इक आंधी ने सब बच्चों से उनका साया छीन लिया
छांव में जिनकी चैन बहुत था जो था जो था बड़े आराम का पेड़

नीम हमारे घर की शोभा जामुन से बचपन का रिश्ता
हम क्या जाने किस रंगत का होता है बादाम का पेड़

  - Anwar Jalalpuri

Bachpan Shayari

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