ऐसा नहीं कि हाल-ए-परेशाँ छुपा सकूँये भी नहीं कि दर्द को महफ़िल में ला सकूँतुझ को भुला के जी सकूँ मुमकिन नहीं है येमुमकिन नहीं है ये भी कि तुझ को मैं पा सकूँ— Arman Habib