बात कोई नहीं जुदाई की
दिल ने बस दिल से बे-वफ़ाई की
कूचे-कूचे में हो गए बदनाम
'इश्क़ में हमने ये कमाई की
हमने भी वाह कह के टाल दिया
उसने जब जब भी कज-अदाई की
हार बैठे जो सब मुख़ालिफ़ तो
दोस्तों ने ही जग हँसाई की
हम क़फ़स में भी सर-बुलंद रहे
इल्तिजा की नहीं रिहाई की
मुझको उस मेहरबाँ ने देकर दिल
लाज रखली मेरी गदाई की
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