husn dar husn phir aazmaane ke baad | हुस्न दर हुस्न फिर आज़माने के बाद

  - A R Sahil "Aleeg"

हुस्न दर हुस्न फिर आज़माने के बाद
खून रोना पड़ा दिल लगाने के बाद

अहल- ए-गुलशन के मातम मनाने के बाद
आप आए भी गुल सूख जाने के बाद

इन रक़ीबों में फोटो खिंचाने के बाद
क्या मिलेगा तुम्हें जी जलाने के बाद

यूँँ तो कहने को कहते रहें आप कुछ
शे'र होता है कोई ज़माने के बाद

खाक़ में मिल गए सब ग़ुरूर ओ गुमाँ
सिर्फ़ तारे नफ़स टूट जाने के बाद

फिर भी देते हैं हम बेवफ़ाओं का साथ
चोट दर चोट दिल टूट जाने के बाद

हो गया जब मुहब्बत से सर मारक़ा
हमनें तलवार फेंकी उठाने के बाद

हमने कुछ भी ख़ुदा से न माँगा कभी
'इश्क़ में आपकी हाँ को पाने के बाद

इस क़दर मुझ पे मरती है पगली कोई
रोने लगती है डीपी हटाने के बाद

थीं पतंगें कटीं और चलीं भी गईं
हाथ धागे बचे बस उड़ाने के बाद

बाद शादी के देखेंगे फिर हम उसे
रंग कैसा है पीहर में आने के बाद
'इश्क़ तो दूरियों में भी मिटता नहीं
रूठती है हवस दूर जाने के बाद

लग के बहती थी साहिल से कल जो नदी
कट गई मुझसे सागर में जाने के बाद

  - A R Sahil "Aleeg"

Wahshat Shayari

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