udaas gamgeen libaas odhe vo sau puraani ghazal rakhi hain | उदास ग़मगीं लिबास ओढ़े वो सौ पुरानी ग़ज़ल रखी हैं

  - A R Sahil "Aleeg"

उदास ग़मगीं लिबास ओढ़े वो सौ पुरानी ग़ज़ल रखी हैं
मुझे जो भेजी थी लिख के मैसेज में, सुहानी ग़ज़ल रखी हैं

जो पत्थरों को भी चीर देंगी, मगर वो दिल को भी पीर देंगी
लहू बहेगा, सुनाऊँगा जब वो बादबानी ग़ज़ल रखी हैं

वो मिसरे जिन
में हैं सौ बहाने, कोई भी पढ़ ले मगर न जाने
सँजो के मैंने वरक़-वरक़ वो कई सयानी ग़ज़ल रखी हैं

वो हर्फ़ जिन
में किए थे वादे, वफ़ा निभाएँगे उम्र भर हम
बुनी है जिस
में ये सब कहानी, तेरी निशानी ग़ज़ल रखी हैं

वो चाँद चेहरा, वो झील आँखें, गुलाब लब थे वो जुल्फ़ नागिन
कही थीं हम ने कभी जो तुझ पर, वो रात-रानी ग़ज़ल रखी हैं

जड़े थे जिस
में सुनहरे नुक़्ते, वो हर्फ़ सारे ही ख़ून-तर थे
मिटा न पाया जिन्हें, वो अश्क़ों का सर्द पानी, ग़ज़ल रखी हैं

मैं छोड़ जाऊँगा जो कहानी, कहेंगे सब सेे वो मेरे मिसरे
पढ़ेगी दुनिया, कही है साहिल ने जो ज़ुबानी ग़ज़ल रखी हैं

  - A R Sahil "Aleeg"

Duniya Shayari

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