शब्दों का जो अपनापन है
रिश्तों का वो ही दामन है
लगता है मुझ को ये सच में
क्रंदन सुख का आभूषण है
ज़िंदा लाशें बोल रही हैं
प्रेम मरण का इक दर्शन है
कुछ दिन में सब यही कहेंगे
सत्य झूठ का इक शोषण है
— Aryan Mishra
रिश्तों का वो ही दामन है
लगता है मुझ को ये सच में
क्रंदन सुख का आभूषण है
ज़िंदा लाशें बोल रही हैं
प्रेम मरण का इक दर्शन है
कुछ दिन में सब यही कहेंगे
सत्य झूठ का इक शोषण है
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