nazar us chashm pe hai jaam li.e baitha hooñ | नज़र उस चश्म पे है जाम लिए बैठा हूँ

  - Arzoo Lakhnavi

नज़र उस चश्म पे है जाम लिए बैठा हूँ
है न पीने का ये मतलब कि पिए बैठा हूँ

रख़ना-अंदाज़ी-ए-अंदोह से ग़ाफ़िल नहीं मैं
है जिगर चाक तो क्या होंट सिए बैठा हूँ

क्या करूँँ दिल को जो लेने नहीं देता है क़रार
जो मुक़द्दर ने दिया है वो लिए बैठा हूँ

इल्तिफ़ात ऐ निगह-ए-होश-रुबा अब क्यूँँ है
पास जो कुछ था वो पहले से दिए बैठा हूँ

दिल-ए-पुर-कैफ़ सलामत कि अकेले में भी
एक बोतल से बग़ल गर्म किए बैठा हूँ

'आरज़ू' जलते हुए दिल के शरारे हैं ये अश्क
आग पानी के कटोरों में लिए बैठा हूँ

  - Arzoo Lakhnavi

Lab Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Arzoo Lakhnavi

As you were reading Shayari by Arzoo Lakhnavi

Similar Writers

our suggestion based on Arzoo Lakhnavi

Similar Moods

As you were reading Lab Shayari Shayari