कई रत-जगों के बा'द जो आँखें मूँदी मैं ने
ख़्वाबों में आ कर बोलीं, बड़े चालाक हो
मिलने का बहाना ढूँढ़ ही लिया तुम ने !
— Ashish Anand
ख़्वाबों में आ कर बोलीं, बड़े चालाक हो
मिलने का बहाना ढूँढ़ ही लिया तुम ने !
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