ऐसा है मेरा यार कि रहवे परे-परे
छूता हूँ तो वो कहता है ये क्या अरे-अरे
उसके क़दम से बढ़ती है रौनक़ बगान की
सूखे शजर भी देते हैं पत्ते हरे-हरे
मैंने दवा बता दिया अब इसके बाद वो
बीमारियों के ऐब में रहकर मरे, मरे
क़ुर्बत के उस मुक़ाम पे आकर खड़ा हूँ मैं
दस्तक भी उनके दिल पे मैं दूँ हूँ डरे-डरे
कहता हूँ शायरों से मोहब्बत न कीजियो
और इसके बावजूद भी कोई करे, करे
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