ऐसा है मेरा यार कि रहवे परे-परे
छूता हूँ तो वो कहता है ये क्या अरे-अरे
उस के क़दम से बढ़ती है रौनक़ बगान की
सूखे शजर भी देते हैं पत्ते हरे-हरे
मैं ने दवा बता दिया अब इस के बा'द वो
बीमारियों के ऐब में रह कर मरे, मरे
क़ुर्बत के उस मुक़ाम पे आ कर खड़ा हूँ मैं
दस्तक भी उन के दिल पे मैं दूँ हूँ डरे-डरे
कहता हूँ शाइरों से मोहब्बत न कीजियो
और इस के बावजूद भी कोई करे, करे
— Ashutosh Vdyarthi















