padhiye sabq yahii hai vafaa ki kitaab ka | पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का

  - Azhar Nawaz

पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का
काँटे करा रहे हैं तआरुफ़ गुलाब का

कैसा ये इंतिशार दियों की सफ़ों में है
कुछ तो असर हुआ है हवा के ख़िताब का

ये तय किया जो मैं ने जुनूँ तक मैं जाऊँगा
ये मरहला अहम है मिरे इज़्तिराब का

माना बहुत हसीन था वो 'उम्र का पड़ाव
क़िस्सा मगर न छेड़िए अहद-ए-शबाब का

'अज़हर' कहीं से नींद का अब कीजे इंतिज़ाम
यूँँही निकल न जाए ये मौसम भी ख़्वाब का

  - Azhar Nawaz

Bekhudi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Azhar Nawaz

As you were reading Shayari by Azhar Nawaz

Similar Writers

our suggestion based on Azhar Nawaz

Similar Moods

As you were reading Bekhudi Shayari Shayari