'इश्क़ है गर तो मिरी ज़ात न पैसे देखे
वो मिरे दिल में मुहब्बत के ख़ज़ाने देखे
कौन हैं वो जो मुहब्बत में मुनाफ़ा पाया
हमने तो दोस्त लगातार ख़सारे देखे
जो कोई सहल समझता है मुहब्बत का सफ़र
वो कभी आ के मिरे पाँव के छाले देखे
ऐसे रोता हूँ तुझे देख के जैसे कोई
बाप इक 'उम्र से बिछड़े हुए बच्चे देखे
हम भला कौन हैं तफ़रीक़ बताने वाले
उस की मर्ज़ी है वो जिस शख़्स को चाहे देखे
आग पानी से कभी मिलती नहीं है कि 'बशर'
उस को बोलो कि न शहज़ादी के सपने देखे
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