chaai ki pyaali men neeli tablet gholi | चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली

  - Bashir Badr

चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली
सह
में सह
में हाथों ने इक किताब फिर खोली

दाएरे अँधेरों के रौशनी के पोरों ने
कोट के बटन खोले टाई की गिरह खोली

शीशे की सिलाई में काले भूत का चढ़ना
बाम काठ का घोड़ा नीम काँच की गोली

बर्फ़ में दबा मक्खन मौत रेल और रिक्शा
ज़िंदगी ख़ुशी रिक्शा रेल मोटरें डोली

इक किताब चाँद और पेड़ सब के काले कॉलर पर
ज़ेहन टेप की गर्दिश मुँह में तोतों की बोली

वो नहीं मिली हम को हुक बटन सरकती जीन
ज़िप के दाँत खुलते ही आँख से गिरी चोली

  - Bashir Badr

Zindagi Shayari

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