कुछ न देना इधर उधर देना
मुझ पे बस जाँ तू इक नज़र देना
बात जब आए बोसे की जाना
मैं कहूँ मत दे तू मगर देना
गर गया पकड़ा फेंकने में ख़त
सारे इल्ज़ाम मुझ पे धर देना
और ख़त पढ़ वो मान जाए गर
तेरा सब मेरे नाम कर देना
देना जब कुछ मुझे ख़ुदा तो बस
भूलने का उसे हुनर देना
मेरे सारे उदासी के धन का
मेरे बेटे तू त्याग कर देना
— Brajnabh Pandey















