बा'द में जा के घुटन वाली बला होती है
शाम से पहले यहाँ ताज़ा हवा होती है
घर में कोई भी नहीं मेरे अलावा इस का
देर से आऊँ तो वीरानी खफ़ा होती है
इस क़दर खुरदुरे होंठों से मैं क्या बात करूँ
इनसे ख़ामुशी भी मुश्किल से अता होती है
इस से बढ़ कर नहीं साए की हक़ीक़त कोई
ये भी तारीकी है बस जिस्मनुमा होती है
— Danish Naqvi















