अंदर की मुख़बिरी को बताने का शौक़ है
फिर उस के बा'द तुझ को लुभाने का शौक़ है
मुश्किल है तुझ से इश्क़ लड़ाना अगर तो सुन
दरिया में मुझ को आग लगाने का शौक़ है
तुझ को है रश्क सिर्फ़ मुहब्बत के नाम से
पत्थर को दिल मुझे भी बनाने का शौक़ है
दीदार किस तरह करूँ हुस्न-ओ-जमाल का
चेहरे से यूँ नक़ाब हटाने का शौक़ है
'दानिश' जो उस के ज़ुल्फ़ में है ख़ूबसूरती
उस
में गुलाब मुझ को लगाने का शौक़ है
— Danish Balliavi















