कोई करे न करे आरज़ू नहीं करते
हर एक शख़्स से हम गुफ़तुगू नहीं करते
हमारे बारे में मुर्शद सभी को मालूम है
कि बात एक भी हम फ़ालतू नहीं करते
किसी की याद में रोते हैं रात भर लेकिन
जिगर के चोट को यूँँ रू-ब-रू नहीं करते
वफ़ा का ज़िक्र करो बे-वफ़ा का ज़िक्र नहीं
हम उसकी अब तो कभी आबरू नहीं करते
हमारे पास भी माशूक़ हैं बहुत 'दानिश'
हम अपने टूटे दिलों का रफ़ू नहीं करते
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