था ख़ुशी का आसरा फ़िरदौस में

पर ख़ुशी थी गुम-शुदा फ़िरदौस में

आज तो है तीरगी लेकिन कभी
था उजाला दीप का फ़िरदौस में

मैं वहाँ पहुंँचा मगर कुछ देर से
कोई था मेरे सिवा फ़िरदौस में

है मुझे दोज़ख़ मुयस्सर आज, पर
था कभी हिस्सा मेरा फ़िरदौस में

जी बहुत मख़्सूस थी मेरी सज़ा
रह रहा था ग़म-ज़दा फ़िरदौस में

— Dipendra Singh 'Raaz'

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