कभी वो सुनेगा कहानी हमारी
कि गुज़री है कैसे जवानी हमारी
गए थे निशानी यहाँ छोड़ कर हम
कहाँ है भला वो निशानी हमारी
मिला तक नहीं पा रही है नज़र वो
हुई थी कभी वो दिवानी हमारी
बचा कर रखी है बड़े ही दिनों से
इसी दिल में यादें पुरानी हमारी
पता तब चला जब गुज़रने लगे दिन
बहुत कम बची जिंदगानी हमारी
यहाँ मुश्क़िलों से घिरे ही रहोगे
अगर बात तुम ने न मानी हमारी
— Divyansh Rawat














