अक़्ल पे बेहोशी का पर्दा डाल रखा हैनाहक़ ही तेरा दर्द सँभाल रखा हैहै खोटा जो बाज़ार-ए-इश्क़ में हम नेसिक्का तेरे नाम का उछाल रखा है— Sushrut Tiwari