जाएँगे कहाँ सर पे जब आ जाएगा सूरज वो लोग जो दीवार के साए में खड़े हैंअल्लाह ये लम्हा तो क़यामत की घड़ी हैइंसान से इंसान के साए भी बड़े हैंहर मोड़ पे हैं सर-ब-फ़लक क़स्र-नुमायाँहर मोड़ पे कश्कोल लिए लोग खड़े हैंइस दर्जा गिरानी है कि पत्थर नहीं मिलतेक़ब्रों पे सलीबें नहीं इंसान गड़े हैं— Fakhr Zaman