Teachers' Day Shayari
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Teachers' Day Shayari

देखा न कोहकन कोई फ़रहाद के बग़ैर आता नहीं है फ़न कोई उस्ताद के बग़ैर — Unknown
अदब ता'लीम का जौहर है ज़ेवर है जवानी का वही शागिर्द हैं जो ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं — Chakbast Brij Narayan
किस तरह 'अमानत' न रहूँ ग़म से मैं दिल-गीर आँखों में फिरा करती है उस्ताद की सूरत — Amanat Lakhnavi
ये फ़न्न-ए-इश्क़ है आवे उसे तीनत में जिस की हो तू ज़ाहिद पीर-ए-नाबालिग़ है बे-तह तुझ को क्या आवे — Meer Taqi Meer
मु-ए-जुज़ 'मीर' जो थे फ़न के उस्ताद यही इक रेख़्ता-गो अब रहा है — Mushafi Ghulam Hamdani
उस्ताद के एहसान का कर शुक्र 'मुनीर' आज की अहल-ए-सुख़न ने तिरी ता'रीफ़ बड़ी बात — Muneer Shikohabadi
जैसे सय्यादों को सय्यादी से रहती है ग़रज़ काम उस्तादों को वैसे अपनी उस्तादी से है — Zafar Kamali
शागिर्द हैं हम 'मीर' से उस्ताद के 'रासिख़' उस्तादों का उस्ताद है उस्ताद हमारा — Rasikh Azimabadi
रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे — Unknown
वही शागिर्द फिर हो जाते हैं उस्ताद ऐ 'जौहर' जो अपने जान-ओ-दिल से ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं — Lala Madhav Ram Jauhar
अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़' मानते हैं सब मिरे उस्ताद को — Hafeez Jalandhari
महरूम हूँ मैं ख़िदमत-ए-उस्ताद से 'मुनीर' कलकत्ता मुझ को गोर से भी तंग हो गया — Muneer Shikohabadi
उन्हीं से रौशनी क़ाएम है मिरी इस दुनिया में जिन के शागिर्द हैं हम उन का बड़ा जलवा है — Akash Rajpoot

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