जब वो क़ातिल हो जाता है

मरने का दिल हो जाता है

मैं ख़ुद से झगड़ा करता हूँ
तू क्यूँ शामिल हो जाता है

उस की चाहत कैसे करूँ मैं
वो तो हासिल हो जाता है

मैं ख़ुद को रस्ता देता हूँ
वो भी दाख़िल हो जाता है

उस का हाथ पकड़ कर 'गौरव'
कितना बुज़दिल हो जाता है

— Gourav Kumar

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